
जालंधर, 07 मार्च (धर्मेंद्र सौंधी) : साल का आखिरी वित्तीय माह चल रहा है और बिल्डिंग ब्रांच पर रेवेन्यु टारगेट पूरा करने का दबाव है। यह दबाव निगम कमिश्नर के आदेशों के बाद डला है। दबाव के बीच रेवेन्यू एकत्रित करने के लिए रिहायशी नक्शे पास किए जा रहे हैं। ये सारे शहर में हो रहा है। दरअसल आदेश हैं कि तय रेवेन्यु टारगेट को तय समय में पूरा किया जाए लेकिन निगम के काबिल अधिकारी अवैध बिल्डिंगों पर कार्रवाई करके सरकार का खजाना भरने की बजाय रिहायशी नक्शों को पास करवाने में जुटे हुए हैं।
बताया जाता है कि शहर के हर सेक्टर में ऐसा हो रहा है। जबकि इन अधिकारियों को चाहिए था कि जिन अवैध रिहायशी और कामर्शियल इमारतों की वजह से निगम के खजाने को चूना लगा है उस पर कार्रवाई की जाए लेकिन इन्होंने ऐसा नहीं किया और सरकार का खजाना भरने की आड़ में अपनी जेब तो भरी ही जा रही है वहीं रिहायशी नक्शों को पास कराने की होड़ लगी हुई है। जब नक्शा पास करवाने की फीस जमा होती है तो अधिकारी एक दूसरे की पीठ थपथपाते हुए घूमते हैं कि देखा मैंने आज कितने पैसे सरकार के खजाने में जमा करवाए हैं। अब जबकि रिहायशी नक्शा पास करवाने का कोई तुक्क ही नहीं बनता सरकार तो अपना खजाना भरने के लिए उन अवैध निर्माणों पर कार्रवाई भी चाहती है जिन्होंने खजाने को चूना लगाया है।